आत्मकल्याण से पारिवारिक समस्याओं का समाधान - Self-Welfare

एक सेठ के पॉँच लड़के थे| सभी लड़को का विवाह हो चुका था| जिनमे से चार के तो बाल-बच्चे भी थे| सबसे छोटे लड़के का विवाह अभी कुछ महीने पहले ही हुआ था और उसकी पत्नी अपने पिता के घर पर थी| सेठ के घर पर काम-काज को लेकर सास बहूओं के बीच में रोज झगड़ा हुआ करता था| सब एक दूसरे से जलती थी और घर के काम से अपना-अपना जी चुराती थी| घर में बहुत ज्यादा कलह और अशांति थी| 

कुछ दिनों बाद सबसे छोटे लड़के की पत्नी भी अपने मायके से आ गई| वह बहुत अच्छे घर की लड़की थी और उसे बचपन से ही अच्छे संस्कार और शिक्षा मिली थी| लेकिन जब उसने अपने  ससुराल का वातावरण देखा तो उसे बहुत दुःख हुआ| एक दिन अपनी सास और जिठाइयों को लड़ते-झगड़ते देखा तो वह रोने लगी और भगवान से प्रार्थना करने लगी - ईश्वर मैंने ऐसा कौन सा बुरा कर्म किया है जो मुझे ऐसा ससुराल मिला| जहाँ सब एक दूसरे से लड़ते ही रहते है और कोई किसी की इज्जत नहीं करता है|

पारिवारिक समस्याओं का समाधान -


इस प्रकार सोचते-सोचते उसकी आँख लग गई| तभी उसके सपने  में भगवान ने आकर कहाँ -पुत्री घबराओ मत ,इस घर के कलह को मिटाने के लिए ही तुम्हे यहाँ पर भेजा है ताकि तुम अपने व्यवहार से सभी के मन में प्रेम उत्पन्न कर सको और सबको कर्तव्यपरायण बना सको| तभी अचानक उसकी आँख खुल जाती है और वह मन ही मन में निश्चय कर लेती है कि वह घर के कलह का मूल कारण जानकर उसे जड़ से खत्म कर देगी| 

पारिवारिक कलह के कारण -


जब उसने कलह का कारण जानना चाहा तो उसे पता चला कि घर के काम को सभी में बाँटा गया है सभी बहुएँ पारी-पारी से खाना बनती है और सास ऊपर का काम करती  है| लेकिन अगर कोई बीमार पड़ जाये तो उसका काम करने के लिए कोई भी तैयार नहीं होता है और इसी कारण से घर में लड़ाई-झगड़ा शुरू हो जाता है| इसके अलावा खाने पीने की चीजों को लेकर ,बच्चों की लड़ाई को लेकर और कभी-कभी तो कपडे और गहने को लेकर भी सास बहुएँ लड़ती है| 

पारिवारिक समस्या -


तब छोटी बहु ने एक उपाय सोचा कि अगर मैं सुबह और शाम का भोजन पकाने की जिम्मेदारी स्वयं ले लू तो घर में कलह का एक कारण तो काम होगा और साथ ही मुझे सभी की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा| 

दूसरे दिन वह सुबह उठी और अपनी बड़ी जिठानी के पास गई जो कि रसोई में खाने की तैयारी कर रही थी क्योंकि उस दिन सबेरे का खाना बनाने की पारी उनकी थी| उसने कहा - दीदी मेरे रहते आप काम करे यह तो सही बात नहीं है| आपको तो खाना बनाने के साथ-साथ अपने बच्चों की देखभाल भी करना पड़ती है  | लेकिन मेरे ऊपर अभी कोई जिम्मेदारी नहीं है इसलिए आप खाना बनाने की जिम्मेदारी मुझे दे दे| तब जिठानी ने कहा - नहीं ,अभी तो तुम्हारे खेलने-खाने के दिन है उसके बाद तो तुम्हे ये सब काम करने ही है इसलिए अभी कुछ दिनों तक आराम करो फिर ये सब करना| 

सुखी परिवार के उपाय -


छोटी बहु ने कहा - दीदी मैं आपके पैर पड़ती हूँ कृपया करके मुझे सुबह का खाना बनाने दे| क्या मुझसे कोई गलती हो गई है जिस कारण से आप मुझे काम नहीं करने दे रही है| इतना कहकर बहु रोने लगी| उसे रोता देखकर जिठानी ने कहा - अच्छा ठीक है मेरी पारी तुम ले लो| इसी प्रकार से उसने सभी जिठानियों से आग्रह करके उन सब की पारी भी ले ली| अब तो वह बहुत प्रसन्न होकर सुबह उठती और सभी के लिए बहुत ही स्वादिष्ट भोजन पकाती और सब को बड़े ही आदर और प्रेम के साथ खिलाती और आखरी में खुद खाती है| इस प्रकार से वह प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन बनाती और ऐसा करके उसे कभी भी किसी भी प्रकार की थकान नहीं होती और न ही वह अपने काम को लेकर किसी से कोई शिकायत करती| उसके ऐसे व्यवहार को देखकर घर का प्रत्येक सदस्य उसकी प्रशंसा करता था| 

आत्मकल्याण से पारिवारिक समस्याओं का समाधान - Self-Welfare



एक दिन उसकी सास उसके पास जाकर बोली - बहु तुमने सभी का काम अपने ऊपर क्यों ले लिया है? तो बहु ने उत्तर दिया - माताजी दूसरों की सेवा करना ही सबसे बड़ा धन होता है| ऐसा करने से मनुष्य का कल्याण होता है क्योकि शरीर तो नष्ट होने वाला है इसे जितना अधिक काम में लगाओ उतना ही यह रोग मुक्त रहता है| उसकी ऐसी बातें सुनकर सास बहुत प्रसन्न हुई और मन ही मन सोचने लगी कि यह कोई देवी का अवतार है जिसमे इतना धैर्य है| 
अगले दिन उसके ससुर सभी बहुओं के लिए साड़ियां और गहने लाये और अपनी पत्नी को बुलाकर बोले - इसे सभी बहुओं में बराबर-बराबर बाँट दो| सास ने सभी बहुओं को बुलाकर साड़ी व गहने दे दिए| लेकिन छोटी बहु ने साड़ी व गहने लेने से मना कर दिया| वह अपनी सास से बोली - माताजी मेरे पास बहुत सी साड़ी व गहने रखे है जो मेरे लिए पर्याप्त है इसलिए आप कृपया करके मेरे हिस्से की साड़ी व गहने भी जिठानियों में बाँट दीजिए| उसकी ऐसी उदारता देखकर सभी लोग चकित रह गए| तब सास ने पूछा - बेटी तुमने वस्त्र और गहने क्यों नहीं लिए? इस पर बहु ने कहा - माताजी ये सब चीजे आत्मकल्याण के मार्ग में बाधक है इसलिए इसका ज्यादा संग्रह नहीं करना चाहिए| जो लोग इसके मोह में पड़ जाते है उन्हें मुक्ति नहीं मिलती है| बहु की ऐसी बातें सुनकर सास बहुत प्रसन्न हुई| इस प्रकार छोटी बहु ने अपने साधु व्यवहार से सभी के मन को जीत लिया| 

बहु के द्वारा घर में सुख-शांति -


एक दिन सास ने बड़ी बहु के पास जाकर उससे कहा - इस छोटी बहु से थोड़ा सावधान रहना| यह हम सब की सेवा करके हमारी आध्यात्मिक कमाई को छीन रही है जो की आत्मा का कल्याण करती है| इसलिए मैंने तो सोच लिया है अब एक समय का भोजन बनाने की जिम्मेदारी मैं लूँगी ताकि मैं भी अपनी आत्मा का कल्याण कर सकूँ| सास की इन बातो को सभी बहुएँ सुन रही थी उन्होंने सोचा अगर सास और छोटी बहु अपनी आत्मा का कल्याण कर रही है तो फिर हम इससे वंचित क्यों रहे इसलिए हम सब भी घर वालों की सेवा करके अपना कल्याण करेंगे| फिर क्या सब जिठानियों ने छोटी बहु से अपनी-अपनी खाना बनाने की पारी ले ली और बहुत ही प्रेम और उत्साह के साथ वे सभी को भोजन बनाकर खिलाने लगी| जिस घर में खाना बनाने को लेकर रोज झगड़ा होते थे उस घर में अब सभी बहुये बहुत ही प्रेम के साथ भोजन बनाती थी| इतना ही नहीं अगर कोई बहु बीमार हो जाये तो उसकी पारी का भोजन बनाने के लिए सभी बहुये तत्पर रहती थी| 

अब छोटी बहु को कोई भी भोजन बनांने ही नहीं देता था| तब उसने सेवा का दूसरा मार्ग ढूँढा और वह घर का ऊपरी काम करने लगी जैसे बर्तन धोना साफ-सफाई करना आदि| छोटी बहु ने सोचा इतना काम पर्याप्त नहीं है इसलिए मैं घर पर गेहूँ पीसना भी शुरू कर देती  हूँ ताकि सभी को शुद्ध आटा मिल सके| जब इस बात का पता सास व सभी जिठानियों को चला तो उन्होंने सोचा यह आत्मकल्याण का कोई नया तरीका है तभी छोटी बहु ये काम कर रही है| सभी ने जाकर  छोटी बहु से पूछा - इन काम को करने से क्या होता है? क्या यह भी आत्मा का कल्याण करने वाले काम है? तब छोटी बहु ने बड़े प्रेम से कहा - मैं आपको इन सब का रहस्य नहीं बताऊँगी नहीं तो आप सब लोग मुझे ये सब काम भी नहीं करने दोगे| 

तब सास ने बड़े प्रेम से कहा - नहीं पुत्री अब तेरे काम में कोई बाधा नहीं डालेगा केवल तुम हम सब को इन कामों का आध्यात्मिक रहस्य बता दो| तब बहु ने कहा - माताजी भोजन बनाने का काम करने से सालभर में, आटा पीसने का काम करने से छः महीने में आत्मा का कल्याण होता है लेकिन कुएँ से पानी भरने के काम से केवल तीन महीने में ही आत्मा का कल्याण किया जा सकता है क्योकि इस काम को करने में मेहनत ज्यादा लगती है| बर्तन धोने का काम करने से दो महीने और अगर हम किसी बीमार व्यक्ति का मल-मूत्र साफ करने का काम करते है उसकी सेवा करते है तो केवल एक महीने में ही आत्मा का कल्याण किया जा सकता है| 

पारिवारिक जीवन -


छोटी बहु की बातों को सुनकर घर के सभी लोगों की आँखे खुल गई| अब सभी लोग अपना-अपना काम बहुत ही प्रसन्नता के साथ करने लगे| जिस घर में काम को लेकर रोज कलेश होता था अब उस घर में सुख-शांति का वास हो गया| यह तक घर के बच्चे भी अपना काम जिम्मेदारी के साथ करने लगे और घर में धन भी पहले से ज्यादा आने लगा| यह सब छोटी बहु के साधु व्यवहार के कारण हुआ था| उसने अपने सेवा भाव से सभी घर वालों के  मन में जगह बनाई और घर के कलह को भी पूरी तरह से समाप्त कर दिया|

तभी तो कहते है कि एक महान व्यक्ति की संगत करने से दुष्ट से दुष्ट मनुष्य भी अच्छे आचरण का बन जाता है| इसलिए हमें हमेशा अच्छे लोगों की ही संगत करनी चाहिए और दूसरो की सेवा करनी चाहिए ताकि जल्दी से जल्दी आत्मा का कल्याण किया जा सके| 

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