नैतिक शिक्षा का महत्व क्या है?

नैतिक शिक्षा का महत्त्व इसलिए है क्युकी भविष्य में आने पीढ़ी को नैतिक शिक्षा से परिचित करवाना अति आवश्यक है। क्युकी बचपन से जिन बच्चो को नैतिक शिक्षा मिली है या मिलती है वो समाज में हमेशा एक अलग छवि वाले होते है। यही कारण है की हर बच्चे को अपनी किसी न किसी क्लास में नैतिक शिक्षा का महत्व लिखना होता है। ये प्रश्न ज्यादातर परीक्षाओं में आवश्यक रूप से पूछा जाता है। नैतिक शिक्षा का महत्व निबंध लिखते समय आप ये नीचे दिए जानकारी को समझ सकते है। तो समझते है की नैतिक शिक्षा का क्या महत्व है?

  • शारीरिक स्वास्थ्य का प्रशिक्षण
  • मानसिक स्वास्थ्य का प्रशिक्षण
  • उपयुक्त सामाजिक आचरण
  • नागरिक अधिकार एवं कर्त्तव्य

नैतिक शिक्षा का अर्थ किसी धर्म या सविंधान की शिक्षा नहीं होता बल्कि एक मानव के क्या क्या गुण होने चाहिये, उनको सीखना और सीखाना है। 

नैतिक शिक्षा का महत्व क्या है? - Naitik Shiksha ka mahatva



अनुशासन - 
नैतिक शिक्षा के द्वारा बच्चे या व्यक्ति को समय या किसी कर्तव्य के प्रति अनुशासित रहना सीखाता है। यहाँ अनुशासन का अर्थ अपने कर्तव्य को समय पर करना है। 

आत्मरक्षा -
नैतिक शिक्षा का महत्व इसलिए भी वढ जाता है क्युकी इससे बच्चे को सबसे पहले अपनी आत्मरक्षा सिखाई जा सके। आत्मरक्षा अर्थात अपनी खुद की रक्षा करना है। जब तक आप अपनी आत्मरक्षा नहीं कर सकते तो आप अपने परिवार को नहीं बचा सकते, न समाज और न देश को। 
आत्मरक्षा को अपमान नहीं बल्कि वीरगति समझे। और साहस का सदुपयोग करे।जब देश में महामारी हो, विदेशी आक्रमण हो, या राष्ट्रविरोधी गतिविधि हो। 

असहिष्णुता -
असहिष्णुता अर्थात असहनशीलता। इसका अर्थ यह है की आप सामने वाले के विचार को सुनना भी न पसंद करे। 

धार्मिक ज्ञान -
अपने धर्म के वारे में अच्छे से पता होना आवश्यक है क्युकी विदेशी लोग हमेशा ऐसे लोगो को अपना शिकार बना कर उन्हें माध्यम बनाते है ताकि देश को लूट सके। इसमें धर्म परिवर्तन करना विदेशियों के लिए सबसे ज्यादा आसान और देश के लिए खतरनाक है। 

प्रेम -
मनुष्य अपने आस पास सबसे प्रेम करे यह नैतिक ज्ञान से ही सम्वन्धित है। प्रेम के द्वारा तो ईश्वर को भी वश किया जा सकता है। नैतिक शिक्षा से समाज में हिंसा में कमी देखने को मिलती है, जिससे एक शांत और मिलनशील समाज का गठन होता है।

सदभावना - 
नैतिकता से ही व्यक्ति के अंदर सदभावना के भाव पैदा होते है जैसे की उदारता, संस्कार अर्थात अपने शास्त्रों का ज्ञान, विनम्रता और शांत व्यवहार। 

कर्तव्य का ज्ञान -
मनुष्य को अपने कर्तव्यों का ज्ञान होना अति आवशयक है।  धर्म अगर किताब है तो कर्तव्य उस किताब के पन्ने है। हर मनुष्य का अपना कर्तव्य अलग कर्तव्य होता है उसे अपने कर्तव्य का ज्ञान होना आज अपने युवाओ की सबसे बड़ी जरुरत है। 

सत्यभाषण - 
हमेशा सत्य बोलना चाहिए।  अगर आज आप पर कोई भरोसा नहीं करता तो आप सत्य भाषण से दूर है। 

एकता -

जब देश में महामारी हो, विदेशी आक्रमण हो, या राष्ट्रविरोधी गतिविधि हो। तब देश की किसी भी सरकार का विरोध नहीं करना चाहिए। बल्कि सरकार का साथ देकर एक होना चाहिए। 

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