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पिता की वसीहत और नसीहत

एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना । पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पिता की आखरी इक्छा बताई ।
पंडितजी ने कहा: हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है। पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो । बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ।

इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी
मेरे प्यारे बेटे
देख रहे हो..? दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता ।
एक रोज़ तुम्हें भी मृत्यु आएगी, आगाह हो जाओ, तुम्हें भी एक सफ़ेद कपडे में ही जाना पड़ेगा ।
लिहाज़ा कोशिश करना,पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना, ग़लत तरीक़े से पैसा ना कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना ।
सबको यह जानने का हक है कि शरीर छूटने के बाद सिर्फ कर्म ही साथ जाएंगे"।
लेकिन फिर भी आदमी तब तक धन के पीछे भा…
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सबसे पहले रामायण महाकाव्य किसने लिखी, किसने सुनी और किसने सुनाई??

ये प्रश्न जितना कठिन है उतना ही इसका सरल उत्तर है. यहाँ में आपको विस्तार नहीं बल्कि जो प्रश्न है उसका सटीक और कम से कम शब्दो में उत्तर देना चाहूंगा. आपको लगता होगा की रामायण एक ही है ???
जबकि मेरे हिसाब से बहुत सारी रामायण है जिनको भिन्न भिन्न महापुरुषों द्वारा अनुवाद या लिखा गया है. जैसे एक रामायण महर्षि वाल्मीकि ने लिखी है, दूसरी रामायण स्वामी तुलसीदास ने लिखी है, संस्कृत में भी कालिदास ने रघुवंश की रचना की, उसी प्रकार जैन, बोद्ध, सिख और नेपाली में रामायण के अलग अलग रचनाये मिलती है
Who wrote the first epic Ramayana, and who told who heard first??

रामायण सबसे पहले किसने लिखी ?

ये बात भारत के 99% लोग जानते है की रामायण महर्षि वाल्मीकि ने सबसे पहले लिखी. आइये जानते है की कौन है महर्षि वाल्मीकि??

महर्षि वाल्मीकि को प्राचीन वैदिक काल के महान ऋषियों कि श्रेणी में प्रमुख स्थान प्राप्त है। वह संस्कृत भाषा के आदि कवि और हिन्दुओं के आदि काव्य 'रामायण' के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध हैं। महर्षि कश्यप और अदिति के नवम पुत्र वरुण (आदित्य) से इनका जन्म हुआ। इनकी माता चर्षणी और भाई भृगु थे। वरुण का एक नाम प्रचेत भी है, इसलिए इन्हें प्राचेतस् नाम से उल्लेखित किया जाता है। उपनिषद के विवरण के अनुसार यह भी अपने भाई भृगु की भांति परम ज्ञानी थे।

महर्षि वाल्मीकी का जीवन चरित्र : - 

एक पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि बनने से पूर्व वाल्मीकि रत्नाकर के नाम से जाने जाते थे तथा परिवार के पालन हेतु लोगों को लूटा करते थे। एक बार उन्हें निर्जन वन में नारद मुनि मिले, तो रत्नाकर ने उन्हें लूटने का प्रयास किया। तब नारद जी ने रत्नाकर से पूछा कि- तुम यह निम्न कार्य किसलिए करते हो, इस पर रत्नाकर ने जवाब दिया कि अपने परिवार को पालने के लिए।

इस पर नारद ने प्रश्न किया कि तुम जो भी अपराध करते हो और जिस परिवार के पालन के लिए तुम इतने अपराध करते हो, क्या वह तुम्हारे पापों का भागीदार बनने को तैयार होंगे। इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए रत्नाकर, नारद को पेड़ से बांधकर अपने घर गए। वहां जाकर वह यह जानकर स्तब्ध रह गए कि परिवार का कोई भी व्यक्ति उसके पाप का भागीदार बनने को तैयार नहीं है। लौटकर उन्होंने नारद के चरण पकड़ लिए।

तब नारद मुनि ने कहा कि- हे रत्नाकर, यदि तुम्हारे परिवार वाले इस कार्य में तुम्हारे भागीदार नहीं बनना चाहते तो फिर क्यों उनके लिए यह पाप करते हो। इस तरह नारद जी ने इन्हें सत्य के ज्ञान से परिचित करवाया और उन्हें राम-नाम के जप का उपदेश भी दिया था, परंतु वह 'राम' नाम का उच्चारण नहीं कर पाते थे। तब नारद जी ने विचार करके उनसे मरा-मरा जपने के लिए कहा और मरा रटते-रटते यही 'राम' हो गया और निरंतर जप करते-करते, ध्यान में बैठे हुए वरुण-पुत्र के शरीर को दीमकों ने अपना घर बनाकर ढंक लिया था। साधना पूरी करके जब यह दीमकों के घर (जिसे वाल्मीकि कहते हैं) से बाहर निकले तो लोग इन्हें वाल्मीकि कहने लगे।  और वह ऋषि वाल्मीकि बन गए।


महर्षि वाल्मीकि ने रामायण महाकाव्य का पहला श्लोक कैसे लिखा??

एक बार महर्षि वाल्मीकि नदी के किनारे क्रौंच पक्षी के जोड़े को निहार रहे थे, वह जोड़ा प्रेमालाप में लीन था। तभी एक व्याध ने क्रौंच पक्षी के एक जोड़े में से एक को मार दिया। नर पक्षी की मृत्यु से व्यथित मादा पक्षी विलाप करने लगी।

उसके इस विलाप को सुन कर वाल्मीकि के मुख से खुद ही
मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। 
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्।। 

नामक श्लोक फूट पड़ा और यही महाकाव्य रामायण का आधार बना। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित पावन ग्रंथ रामायण में प्रेम, त्याग, तप व यश की भावनाओं को महत्व दिया गया है। वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना करके हर किसी को सद्‍मार्ग पर चलने की राह दिखाई।

सर्वप्रथम रामायण किसने सुनी और रामायण को किसने सुनाया ?

यह जानकार आपको आश्चर्य्र होगा की वेदों और मान्यताओ के अनुसार ...रामायण की कहानी सबसे पहले खुद श्री राम ने ही सुनी थी वो भी अपने पुत्रो "लव" और "कुश" के मुख से. जब श्री राम ने ये कहानी सुनी तो उन्होंने बालको से पूछा की हे बालको ये कहानी तो बहुत ही अच्छी है किसकी है ?? तो लव-कुश ने उत्तर दिया आपकी ही कहानी है...तो श्री राम ने हसकर कहा "नहीं ये मेरी कहानी नहीं हो सकती ...इसमें जो राम है वो बहुत ही महान है, में उतना नहीं हु".

क्या नारद ऋषि ने सबसे पहले रामायण वाल्मीकि को सुनाई??
जैसा की आप जानते है इस दुनिया ज्यादातर ज्ञान शिव जी के मुख से सुनाया गया है, जो की उन्होंने माता सती और पार्वती को सुनाया है, रामायण का वर्णन शिव जी ने माता पार्वती से किया है, और उसे काकभुसुंडि द्वारा सुना गया था, उसके बाद नारद ने काकभुसुंडि से सुना और नारद जी ने रामायण कथा को वाल्मीकि को सुनाई थी जिसे सुनकर उनका  ह्रदय परिवर्तन हुआ था. और उस रामायण कथा को काव्य में महर्षि वाल्मीकि ने लिखा. कहते है जब सीता जी अपने पुत्रो (लव-कुश) के साथ उनके आश्रम में रहती थी तो उन्हें (वाल्मीकि) पहले से ही होने वाली घटनाओ के बारे में पता था.


अगर आपके मन में कोई प्रश्न है भारतीय वेद पुराणों से सम्बंधित तो कमेंट के जरिये पूछ सकते है. हम कोशिश करेगे ...ज्ञान के सागर (वेदों और पुराणों) से आपके प्रश्न का उत्तर ढूढने का. ॐ नमः शिवाय

Comments

  1. सर्व प्रथम रामायण को हिंदी में किसने और कब लिखा ??

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    Replies
    1. रामायण को हिंदी में लिखा ही नहीं गया, बल्कि उसे हिंदी में अनुवाद किया गया है, रामायण तो काव्य है मतलब कविता. हिंदी अनुवाद में उसे कहानी के रूप में बताने का प्रयास किया गया ताकि लोगो को आसानी से समझ में आ सके. और ये सब अंग्रेजो के समय में हुआ क्युकी वो खुद इन काव्यों को समझना चाहते थे, इसलिए पहले इसे इंग्लिश में अनुवादित किया गया फिर इंग्लिश से हिंदी अनुवाद किया गया. आपने भी देखा होगा की बड़े-बूढ़े लोग चोपाई के जरिये ही रामायण को बताते और समझाते थे. :-)

      Delete
  2. Ramayan ki Rachana mahrshi valmiki ne Ramayan ghatna se pehle Kiya ya bad me??

    ReplyDelete
  3. Sir g mujhe bhagwaan ravaan ki photo mil jaye urignal face to main ap sab k abhri hounga... Mere what's app no.
    80543-48189 hai plz

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  4. Kya ramayan vaidik period ki hai

    Or Shri ram ji Jo hai wo bhi vaidik kaal mai hi aaye the Kya???


    Please answer

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भक्ति रस

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                       एवँ
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बन्दर की सीख - Hindi Story On Taking Risks

बंदरों का सरदार अपने बच्चे के साथ किसी बड़े से पेड़ की डाली पर बैठा हुआ था .
बच्चा बोला , ” मुझे भूख लगी है , क्या आप मुझे खाने के लिए कुछ पत्तियां दे सकते हैं ?”

बन्दर मुस्कुराया , ” मैं दे तो सकता हूँ , पर अच्छा होगा तुम खुद ही अपने लिए पत्तियां तोड़ लो.“
” लेकिन मुझे अच्छी पत्तियों की पहचान नहीं है .”, बच्चा उदास होते हुए बोला .
“तुम्हारे पास एक विकल्प है , ” बन्दर बोला , ” इस पेड़ को देखो , तुम चाहो तो नीचे की डालियों से पुरानी – कड़ी पत्तियां चुन सकते हो या ऊपर की पतली डालियों पर उगी ताज़ी -नरम पत्तियां तोड़ कर खा सकते हो .”
बच्चा बोला , ” ये ठीक नहीं है , भला ये अच्छी – अच्छी पत्तियां नीचे क्यों नहीं उग सकतीं , ताकि सभी लोग आसानी से उन्हें खा सकें .?”

“यही तो बात है , अगर वे सबके पहुँच में होतीं तो उनकी उपलब्धता कहाँ हो पाती … उनके बढ़ने से पहले ही उन्हें तोड़ कर खा लिया जाता !”, ” बन्दर ने समझाया .

” लेकिन इन पतली डालियों पर चढ़ना खतरनाक हो सकता है , डाल टूट सकती है , मेरा पाँव फिसल सकता है , मैं नीचे गिर कर चोटिल हो सकता हूँ …”, बच्चे ने अपनी चिंता जताई .

बन्दर बोला , “सुनो बेटा , एक बात हमेशा …