संकल्प और विकल्प का अर्थ क्या है?

अगर आप अपने जीवन में सुखी जीवन व्यतीत करना चाहते है तो आपको संकल्प और विकल्प का अर्थ जरूर पता होना चाहिए। लेकिन यहाँ हम संकल्प और विकल्प का अर्थ सिर्फ आपके मन के लिए करेंगे। 

कई लोग जीवन में सफल होते है और कई लोग जीवन में असफल। इसके लिए सबसे पहले अपनी प्रकृति समझनी होगी अर्थात आपको ये पता होना चाहिए की आप कोई भी कार्य करने से पहले संकल्प लेते है या उस कार्य से बचने के लिए विकल्प ढूढ़ते है?

तो आपको बता दे इसमें सबसे बड़ा दोष या गुण उस व्यक्ति के मन का होता है। आपको ये देखना है की आपका मन किसी कार्य को करने के लिए संकल्प लेने के लिए दृढ रहता है या उससे डर कर विकल्प ढूढ़ने के लिए प्रेरित करता है। अर्थात आप मन को कंट्रोल करते है या मन आपको कण्ट्रोल करता है. ये देखना है। 

संकल्प और विकल्प का अर्थ क्या है? Sankalp and Vikalp

क्या करे फिर ?

आप ये जान ले की दुनियां में तीन तरह के व्यक्ति होते है। 
  1. पहला व्यक्ति - जो जानता नहीं, कि सही क्या है। 
  2. दूसरा व्यक्ति - जो जानता है कि सही क्या है, लेकिन फिर भी गलत करता है। 
  3. तीसरा व्यक्ति - जो जानता है कि सही क्या है और सही ही करता है। 

तो अगर आप पहले तरह के व्यक्तित्व वाले है अर्थात आपको पता ही नहीं, की सही क्या है, तो अपने गुरुजनो और परिवार में राय ले, फिर एक औसत निष्कर्ष निकाल कर संकल्प या विकल्प चुने। 

अगर आप दूसरे तरह के व्यक्ति है तो आप समझ लीजिये की आप किसी भी कार्य को जिम्मेदारी से नहीं करते है, काम से बचने के विकल्प खोजते है। अर्थात इनके ऊपर इनके मन का कण्ट्रोल रहता है। ऐसे लोग अपने किसी भी कार्य या लक्ष्य में बहुत कम सफल होते है। इनके जीवन को सिर्फ योग ही बचा सकता है, जो मन को एकाग्र करता है। 

अगर आप तीसरे तरह के व्यक्ति है जो जानता है कि सही क्या है और सही ही करता है। अर्थात ये कार्य को शुरू करने से पहले संकल्प लेते है और उसे लक्ष्य की प्राप्ति तक पूरा करने में लगे रहते है। ऐसे व्यक्ति 99 प्रतिशत तक सफल होते है। क्युकी ये मन की नहीं सुनते सिर्फ विश्वास होता है की मनुष्य चाहे तो कुछ भी कर सकता है। 

यहाँ संकल्प का अर्थ किसी भी कार्य को पूरा करने की शपथ लेना। और विकल्प का अर्थ किसी कार्य से मुँह चुरा कर अन्य आरामदायक विकल्प ढूढ़ना। तो फिर आप जैसे ही संकल्प लेकर किसी कार्य की शुरुआत करते है वो कार्य आपके संकल्प लेने के साथ ही 50 प्रतिशत पूरा हो जाता है। 

आपको ये जानकारी कैसी लगी? कृपया कमेंट के माध्यम से जरूर बताये। 

नैतिक शिक्षा वह साधन है जिसके द्वारा लोग दूसरों में नैतिक मूल्यों या आदर्शो का संचार करते हैं। यह कार्य घर, विद्यालय, मन्दिर, जेल, मंच या किसी सामाजिक स्थान (जैसे पंचायत भवन) में किया जा सकता है|.

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