नैतिक शिक्षा किसे कहते हैं? (Naitik Shiksha)

नैतिक शिक्षा को समझने के लिए सबसे पहले आपको नैतिक शब्द का अर्थ पता होना चाहिए। नैतिक या नैतिकता का अर्थ वह अच्छा व्यवहार या कर्तव्य जिसकी हम हमेशा दुसरो से अपेक्षा करते है। अगर हम यह चाहते है की हमारे साथ सब लोग अच्छे से अच्छा व्यवहार करे उसके लिए सबसे पहले आपको बदलना होना। जब आप दुसरो के साथ अच्छा व्यवहार करना शुरू करते है कुछ समय बाद आपके साथ भी अच्छा व्यवहार होने लगता है। इस तरह के अच्छे व्यवहार या कर्म का समाज में आदान प्रदान नैतिकता कहलाता है। 

नैतिकता के मुख्य मूल तत्व है - बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, सत्य, संवेदनशीलता, क्षमा, निष्काम कर्म, सहायता आदि है। 

नैतिकता को समझने के लिए हमारे पूर्वजो और ऋषियों द्वारा नीतिशास्त्र का निर्माण और उसपर जोर दिया जाता रहा है। 

अगर हम अपने बच्चो को अच्छा इंसान बनाना चाहते है। तो इसके लिए उन्हें नैतिक कर्तव्य का ज्ञान होना अति आवश्यक है। ऐसा संभव नहीं है की आप बच्चो को दुसरो के लिए बुरा बनाये और वो आपके लिए अच्छे रहे। इसलिए नैतिकता इस मानव जीवन का अभिन्न अंग है। अगर किसी व्यक्ति में नैतिकता न हो वो व्यक्ति निश्चित ही चोर, दम्भी, अहंकारी, बलात्कारी, कपटी इंसान बनेगा। जिसे हम अनैतिक व्यक्ति कहते है।  ऐसे लोगो का पतन निश्चित होता है। इन लोगो को समाज की तो छोडो परिवार के लोग भी साथ नहीं देते। 

नैतिक शिक्षा की शुरुआत -

नैतिक शिक्षा की आवयश्कता मनुष्य के लिए जीवन भर रहता है लेकिन इसको सीखाने का एक समय होता है। वो समय होता है बालावस्था। क्युकी बाल अवस्था नैतिक शिक्षा का ज्ञान देने पर, आगे के कुछ वर्षो में उन नैतिक मूल्यों का इस्तेमाल करके उनकी मानव जीवन में आदत डालनी होती है। 


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नैतिक शिक्षा से सम्बंधित कुछ प्रश्न उत्तर -

नैतिक से आप क्या समझते हैं?

नैतिकता मानव समाज का एक अभिन्न अंग है। हमारे द्वारा किए गए किसी भी कार्य में नैतिक आधार होता है। मानव समाज में नैतिकता की भूमिका की अवश्य हो यह निर्धारित करने में निहित है। इस प्रकार, नैतिकता एक दार्शनिक अवधारणा है जिसमें सही कार्य करने की भावनाओं को व्यवस्थित करना, और गलत कार्य करने की भावनाओं को हटाना, और अनुशंसा करना शामिल है।

नैतिक  मूल्यों का हमारे जीवन में क्या महत्व है?

नैतिकता का सम्बंध मानव जीवन की अभिव्यक्ति से हैं। मानव जीवन में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता, महत्त्व अनिवार्यता व अपरिहार्यता जरुरी हैं, ताकि वह अपने परिवार के साथ -साथ सामाजिक और देश के प्रति दायित्व को भी निभा सके। नैतिकता सामाजिक जीवन को सुगम एवं विस्तृत बनाती हैं । सनातन धर्म के वैदिक मन्त्रों में नैतिकता को विशेष महत्व दिया जाता हैं ।

नैतिकता का मूल तत्व क्या है?

बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को प्रशासनिक मूल्यों के आधारभूत तत्त्व कहा जाता है।



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