अहंकार किसे कहते है? Ego

अहंकार एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने आप को दूसरों से श्रेष्ठ मानता है और अपनी उपलब्धियों और गुणों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है। ऐसा व्यक्ति दूसरों की आलोचना या विरोध को सहन नहीं कर सकता। अहंकारी व्यक्ति अक्सर दूसरों की भावनाओं और जरूरतों को नजरअंदाज करता है और अपने स्वयं के हितों और इच्छाओं को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करता है। 

अहंकार सबसे बड़ा नकारात्मक गुण है, जिसमे व्यक्ति ऐसे अपना सिर हिलाता रहता है, अर्थात नहीं नहीं करता रहता है जैसे बुढ़ापे में लोगो को सिर हिलाने की बिमारी लग जाती है, जिसमे डमरू की तरह सिर हिलता रहता है। गांव में लोग इसे डमरुआ बीमारी कहते है। 

अहंकार की जड़ क्या है?

अहंकार का बीज ऐसे पैदा होता है, जो दिन रात बढ़ता रहता है, और व्यक्ति वास्तविकता से बहुत दूर हो जाता है। 

काम (इच्छाओ) से क्रोध, क्रोध से लोभ, लोभ से मोह, मोह से मद, मद से मदस्तर और फिर इसके आगे अहंकार आता है। जिसमे व्यक्ति आँखे होते हुए देखता नहीं, कान होते हुए भी किसी की सुनता नहीं, बुध्दि होने पर सोचता नहीं। 

अहंकार किसे कहते है?

बुढ़ापे में बिमारी की तरह हर किसी की बात पर नहीं नहीं करता रहता है, यह अहंकार है। 

जो लोग कहते है कि तुमने मेरा अहंकार (Ego) हर्ट कर दिया उनका क्या?

अगर आपके बीच में कोई ऐसा जो कहता है तुमने मेरा ईगो हर्ट कर दिया, तो उससे जितनी जल्दी हो सके दूरी बना ले। क्युकी उसका ईगो आगे भी हर्ट होता रहेगा, और वो आपका नुक्सान करने से पहले बिल्कुल नहीं सोचेगा।

अहंकार किसे कहते है? जो लोग कहते है कि तुमने मेरा अहंकार (Ego) हर्ट कर दिया उनका क्या?

 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

इसी प्रकार से आपको अन्य नैतिक शिक्षा के प्रश्न की लिस्ट - Naitik Shiksha Ke Prashn List यहाँ से मिल जाएगी।