देशभक्ति Patriotism (राष्ट्रभक्ति) क्या है?

देशभक्ति शब्द दो शब्दों को मिलाकर बना है। देश + भक्ति।  तन मन और धन से अपना घर परिवार देखते हुए भी देश की सेवा की जा सकती है। या देश के लिए कुछ किया जा सकता है वह देश भक्ति है। जैसे -

तन से समर्पित देश भक्ति -

आप अपनी ज़िंदगी का कुछ समय अपनी मिटटी के लिए भी दे सकते है। जैसे की समाज़ में बुरे बदलाव को रोकना और अच्छे बदलाव को लाना। आप अपने गांव, शहर, में भौतिक व्यवस्थाओं की देख रेख भी कर सकते है। जैसे कही रोड टूटी है तो  सब मिलकर उसकी मरम्मत कर सकते है। ताकि बुरे वक़्त में परेशानी न आये या किसी के साथ दुर्घटना न हो। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए। उस पेड़ पर अपनी नाम प्लेट भी लगाए ताकि आने वाली पढिया आपका इतिहास जान सके। पानी की व्यवस्था करना, साफ़ सफाई में सहयोग, पास के अस्पताल का सहयोग, स्कूल का सहयोग, इत्यादि। आपको ये कही नहीं सोचना की इससे हमें क्या मतलब, और अगर आपके दोस्त ऐसा बोलते है तो उनसे दूर रहे। 

ये सब निस्वार्थ भाव से की गयी सेवाएं है जिन्हे देश भक्ति कहाँ जाता है। जो की ईश्वर की भक्ति से कम नहीं है। 

मन से समर्पित देश भक्ति -

मानसिक तौर पर भी आपको सिर्फ और सिर्फ अपने देश का ही सहयोग करना है। किन्तु आज शिक्षा के आभाव में कुछ लोग बौद्धिक तौर पर देश विरोध में लगे हुए है। जैसे की भारत देश के खेल में हारने पर और पडोसी देश के जीतने पर ख़ुशी जाहिर करना, ये मानसिक तौर से देश के साथ गद्दारी होती है। ऐसे लोग से भ्रमित होते है जो एक दिन अपना ही घर जला डालते है। 
मानसिक रूप से देश विरोधी लोगो एक और पहचान है की वो देश से ज्यादा महत्त्व अपनी जाति को देते है। जैसे अगर अपनी जाती का सरपंच या विधायक चुनाव में खड़ा है तो वोट उसी को देंगे बेशक वो कितना ही बेईमान या दुष्ट हो। उन्हें ये नहीं पता होता की दुष्ट न तो अपने परिवार का सगा होता है और न समाज का। वो एक न एक दिन आपका भी नुक्सान है। 
ये पूर्णतः देश विरोधी कृत्य है। क्युकी इससे समाज का विनाश होता है। क्युकी जब गठबंधन की सरकार बनती है तो बन्दरबाँट होती है, क्युकी दुष्ट चुनाव जीतने के लिए बहुत पैसा खर्च करते है। फिर उसको वसूलने और कमाने में लगे रहते है। समाज की हालत दिन प्रतिदिन ख़राब होती चली जाती है। इसलिए मानसिक तौर पर  देश से प्रेम करे और उन्ही को वोट दे जो वास्तव् में आपके लिए कुछ कर सकता है। 

देशभक्ति के लिए धन समर्पण -

अपनी कमाई का 2-3 प्रतिशत भी अगर आप देश के लिए खर्च करे तो आपकी देशभक्ति भावना को प्रदर्शित करता है साथ ही साथ आप अपने परिवार के बच्चो इत्यादि में एक अच्छे उदहारण बनते है।  साथ ही साथ आप समाज की सेवा करके प्रभु की कृपा भी प्राप्त करते है। 
धन के द्वारा आप गरीब बच्चो को पढ़ा सकते है। जानवरो को घास पानी की व्यवस्था कर सकते है। अपने आस पास साफ़ सफाई करवा सकते है। शहीद के परिवार   के लोगो की देखभाल कर सकते है। 

हमारे पालन पोषण में देश के प्रत्येक पदार्थ और वस्तु का इस्तेमाल होता है। बच्चे कभी जानने की कोशिश नहीं करते है की उनकी रोटी का आटा तब आता है जब कोई धुप में अपनी फसल काटता है। बच्चे न भी पूछे तब भी उन्हें देश की प्रत्येक वस्तु या पदार्थ की अहमियत बतानी चाहिए। देश की वायु और वातावरण हमें जीवनदान देते है। देश की सभ्यता और संस्कृति हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करते है। 
कहते है अगर किसी देश के लोगो को गुलाम बनाना है तो उन्हें उनकी सभ्यता और संस्कृति से दूर कर दो। जंगल के आदिवाशी तभी तक सुरक्षित है जब तक वो अपनी सभ्यता और संस्कृति के साथ जीते है. जैसे ही संस्कृति को भुलाते है उन्हें गुलाम बनाने वाले लोग उन्हें घेरना चालू कर देते है। इसकी शुरुआत उन्हें स्वार्थी बनाकर किया जाता है। वो हमेशा मैं, और मेरा में लगे रहते है। भगवान् से दूर हो जाते है। और इंसान को पूजने लगते है। ऐसे लोग तरक्की करने की बजाय गुलामी की ज़िंदगी जीते है। 

मैथिलि शरण गुप्त ने कहा है की देश के अभिमान से शून्य व्यक्ति " वह नर नहीं बल्कि नर पशु निरा है। और मृतक के समान है।" तो यही बात अग्रेंज कवी स्कॉट ने कहा है की -
"जिस व्यक्ति ने अपनी जननी-जन्मभूमि या मिटटी से प्रेम प्रदर्शित नही किया। वह चाहे कितना भी धनवान, ज्ञानवान, बुद्धिमान व्यक्ति क्यों न हो। किन्तु वह अपनी जाती में कभी भी आदर भाजन, सम्मान भाजन, और प्रेम भाजन का पात्र नहीं होता। निज जीवन में भी वह अपने सगे भाई बंधू द्वारा भी शंका या अपमान की दृष्टि से देखा जाता है। मर्त्यु के बाद उसकी धरती पर निंदा होती है और परमलोक में भी आत्मा को शांति नहीं मिलती है। "

देशभक्ति Patriotism (राष्ट्रभक्ति) क्या है?

देश भक्ति के उदहारण विदेशो में भी मिलते है। जैसे 

  • एक छोटा सा जापान देश भक्ति से लबालब रूस को प्रथम विश्व युद्ध में हरा देता है। 
  • एक छोटा सा इजराइल, अरब देशो को मिटटी चटा देता है। 
यहाँ के बच्चे बच्चे देश के लिए मर मिटने को खड़े थे। युवा देश के लिए अनुसन्धान में जुटे थे। 

और अंत में देश भक्ति के लिए सिर्फ इतना ही कहुगा की हमें अपने मातृ विन्दुओं के प्रति शृद्धा रखनी चाहिए। धर्म आज सोया हुआ है। हर व्यक्ति अपना धर्म, कर्तव्य, दया, क्षमा, और भक्ति छोड़कर जातिवाद, स्वार्थ, प्रान्तीयता, भाषा विवाद, लालच में पड़े होने के कारण देश को खंड खंड कर दिए है। नेता इन खंडो को अपनी जूती के नीचे गुलाम बना कर रखते है। जो बाद में भ्रष्टाचार की खान के रूप में दिखाए देते है। 

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