बकरियों का गांव और भेड़ियों की कहानी - वर्ण व्यवस्था

Bakri aur Bhediya Story - सालों पहले एक जंगल में भारती नाम की बूढी बकरी रहती थी, जिसमे बच्चो सहित एक लाख लोगो के अलग अलग परिवार थे । सभी सुखी जीवन व्यतीत करते थे। वो जंगल में स्वछन्द विचरते थे। फिर एक दिन बकरी को खबर लगी की जंगल में भेडियो का झुण्ड आ गया है। और उनकी नज़र बकरी के इस गांव पर है। 

बकरियों का गांव और भेड़ियों की कहानी - वर्ण व्यवस्था Ek Bakri Ke sath bache - Wolf Stories in Hindi



तो बूढी बकरी ने अपने उस गांव में परिवारों को चार वर्णो में विभाजित किया ताकि उसका पूरा गांव सुरक्षित रह सके। 

क्षत्रिय वर्ण -

बकरी ने अपने उस 10000 बकरियों के गांव में ऐसे बच्चो और युवाओं को चुना जो निडर थे। उनको इस झुण्ड के आस पास पहरेदारी पर लगाया। जो पल पल की सूचना एकत्रित करते थे। वो भेडियो की हर चाल पर नज़र रखते थे। उसने सभी को ये भी बताया की में रहु या न रहु आगे जो भी बच्चा पैदा हो अगर उसकी प्रकृति निडर, साहसी और हिम्मती है तो उसे ये क्षत्रिय वाला रक्षा का काम सौपे। 

ब्राह्मण वर्ण -

जो युवा मेमने ज्ञानी थे, जिनको जंगल की ऊबड़ खाबड़ जमीन, कौन सा पौधा खाना है और कौन सा नहीं, भेड़िये की पहचान, आवाज़, हाव-भाव पहचानते थे उनको लोगो को ज्ञान देने की जिम्मेदारी दी गयी। जैसे वो किसी भी बच्चे या युवा को ज्ञानी बना दे उसे अपने साथ शामिल कर बाकी लोगो को समझाने का प्रयत्न करे। क्युकी ज्ञान ही जीव को हर प्रकार की परेशानी से बचा सकता है। ये बात उन लोगो को अच्छे से पता थी।  लेकिन गांव इतना बड़ा था की सबको एक साथ ये बात नहीं समझा सकते थे। 

वैश्य वर्ण -

एक लाख बकरियों के गांव की रक्षा और ज्ञान की व्यवस्था तो हो गयी लेकिन परिवार चलाने के लिए व्यापार  की भी जरुरत थी क्युकी सभी लोगो को पेट भरना था। तो जो लोग ;पारिवारिक किस्म के थे और शांत प्रिय थे उन्हें ये काम दिया गया।  ये काम के बदले घास और घास के बदले दूध या काम देने लेने का काम करने लगे। 

सूद्र वर्ण -

ये ऐसे मेमने थे जो मेहनती और ईमानदार थे। इनका काम जंगल से तरह तरह की घास चुनकर लाना और उसमे से अपने परिवार को देना बची हुयी घास को वैश्य मेमनो के पास जमा कर देते थे। ताकि बुरे समय अर्थात भेड़िये कभी हमला करे या घेर ले तो उससे गांव का गुज़ारा हो सके। 

अब भारती नाम की बूढी बकरी बहुत ही प्रसन्न थी और ख़ुशी से उछल उछल कर सभी का अभिवादन करने लगी, सभी गांव के मेमने और बकरियों का झुण्ड भी निश्चिंत था क्युकी अब भेडियो से रखवाली भी हो रही थी। नए जन्म लेने वाले मेमनो को भेडियो से बचने के खतरे और पहचान का ज्ञान भी मिल रहा था। सबको काम मिल रहा था और सभी सुखी थे। 

कहानी के अगले हिस्से में पढ़ेंगे -

भेडियो द्वारा बकरियों के गांव पर हमला - Wolf Stories in Hindi



सम्बंधित प्रश्न -

वर्ण व्यवस्था से आप क्या समझते है?

वर्ण-व्यवस्था का सैद्धांतिक अर्थ हैः गुण, कर्म अथवा व्यवसाय पर आधारित समाज का चार मुख्य वर्णों मे विभाजन के आधार पर संगठन

वर्ण व्यवस्था से क्या लाभ होता है?

वर्ण व्यवस्था का विधान समाज की विभिन्न श्रेणियों के लोगों में कार्यों का उचित बँटवारा करके सामाजिक संगठन बनाये रखने के लिये किया ताकि प्रत्येक मनुष्य अपने-अपने निर्दिष्ट कर्तव्यों का पालन करते हुए आपसी मतभेदों एवं वैमनस्य से मुक्त होकर अपना तथा समाज का पूर्ण विकास कर सके ।

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