Skip to main content

पिता की वसीहत और नसीहत

एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना । पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पिता की आखरी इक्छा बताई ।
पंडितजी ने कहा: हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है। पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो । बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ।

इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी
मेरे प्यारे बेटे
देख रहे हो..? दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता ।
एक रोज़ तुम्हें भी मृत्यु आएगी, आगाह हो जाओ, तुम्हें भी एक सफ़ेद कपडे में ही जाना पड़ेगा ।
लिहाज़ा कोशिश करना,पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना, ग़लत तरीक़े से पैसा ना कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना ।
सबको यह जानने का हक है कि शरीर छूटने के बाद सिर्फ कर्म ही साथ जाएंगे"।
लेकिन फिर भी आदमी तब तक धन के पीछे भा…
Advertisements

जानिये हिन्दू धर्म के अनुसार स्नान कब और कैसे करना चाहिए ??

जानिये हिन्दू धर्म के अनुसार स्नान कब और कैसे करना चाहिए ??

क्या आप जानते है की स्नान कब ओर केसे करना चाहिए ताकि घर की सुख और समृद्धि बढे, चलिए आज हम हिन्दू धर्म में बताई गयी महत्वपूर्ण बातों में से आज स्नान या नहाने के बारे में जानते है.

यहाँ हम जानने की कोशिश करेंगे स्नान करने का तरीका या स्नान के प्रकार :

अगर आप सुबह के समय नहाते है तो सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में चार उपनाम दिए है।

पहला - मुनि स्नान
जो सुबह 4 से 5 के बीच  किया जाता है। मुनि स्नान सर्वोत्तम है।
.
दूसरा - देव स्नान जो सुबह 5 से 6 के बिच किया जाता है। देव स्नान उत्तम है।
.
तीसरा - मानव स्नान जो सुबह 6 से 8 के बिच किया जाता है। मानव स्नान समान्य है।
.
चौथा - राक्षसी स्नान
जो सुबह 8 के बाद किया जाता है। राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है।

स्नान करते समय करें इस मंत्र का जाप, जीवन के हर क्षेत्र में मिलेगी सफलता :

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।


नदी में स्नान करते समय करें ये काम मिलेगी सफलता :

यदि व्यक्ति नदी में स्नान कर रहा है तो उसे पानी पर ऊँ लिखकर उसमें तुरंत डुबकी लगा देनी चाहिए। ऐसा करने से उसे नदी स्नान का पूर्ण फल प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा भी नष्ट हो जाएगी। इस उपाय को करने से ग्रह दोष शांत होते हैं अौर बुरी नजर से भी बचाव होता है।
जानिये हिन्दू धर्म के अनुसार स्नान कब और कैसे करना चाहिए ??


अब ऊपर बताये अनुसार स्नान करने के फायदे एवं नुकसान :

मुनि स्नान
घर में सुख ,शांति ,समृद्धि, विध्या , बल , आरोग्य , चेतना , प्रदान करता है।

देव स्नान
आप के जीवन में यश , किर्ती , धन वैभव,सुख ,शान्ति, संतोष , प्रदान करता है।

मानव स्नान
काम में सफलता ,भाग्य ,अच्छे कर्मो की सूझ ,परिवार में एकता , मंगल मय , प्रदान करता है।
राक्षसी स्नान
दरिद्रता , हानि , कलेश ,धन हानि , परेशानी, प्रदान करता है ।

पुराने जमाने में इसी लिए सभी सूरज निकलने से पहले स्नान करते थे।  खास कर जो घर की स्त्री होती थी। चाहे वो स्त्री माँ के रूप में हो,पत्नी के रूप में हो,बेहन के रूप में हो। घर के बडे बुजुर्ग यही समझाते सूरज के निकलने से पहले ही स्नान हो जाना चाहिए। ऐसा करने से धन ,वैभव लक्ष्मी, आप के घर में सदैव वास करती है।

उस समय एक मात्र व्यक्ति की कमाई से पूरा हरा भरा पारिवार पल जाता था , और आज मात्र पारिवार में चार सदस्य भी कमाते है तब भी घर में पैसा नहीं रुकता उस की वजह हम खुद ही है । पुराने नियमो को तोड़ कर अपनी सुख सुविधा के लिए नए नियम बनाए है। ये प्रकृति के नियम है जिन्हें ऋषियों और मुनियों ने सबको बताया है, जो भी उस के नियमो का पालन नही करता ,उस का दुष्टपरिणाम सब को मिलता है। इसलिए अपने जीवन में कुछ नियमो को अपनाये । ओर उन का पालन भी करे।



Tags: स्नान मंत्र, स्नान करने का तरीका, स्नान करने का समय, स्नान करने का मंत्र, स्नान के प्रकार, स्नान कब करना चाहिए, स्नान करने का सही समय, नहाने का सही तरीका, नहाने का मंत्र, नहाने के नियम, 

Comments

Follow by Email

Advertisements

Top Reading

सबसे पहले रामायण महाकाव्य किसने लिखी, किसने सुनी और किसने सुनाई??

ये प्रश्न जितना कठिन है उतना ही इसका सरल उत्तर है. यहाँ में आपको विस्तार नहीं बल्कि जो प्रश्न है उसका सटीक और कम से कम शब्दो में उत्तर देना चाहूंगा. आपको लगता होगा की रामायण एक ही है ???
जबकि मेरे हिसाब से बहुत सारी रामायण है जिनको भिन्न भिन्न महापुरुषों द्वारा अनुवाद या लिखा गया है. जैसे एक रामायण महर्षि वाल्मीकि ने लिखी है, दूसरी रामायण स्वामी तुलसीदास ने लिखी है, संस्कृत में भी कालिदास ने रघुवंश की रचना की, उसी प्रकार जैन, बोद्ध, सिख और नेपाली में रामायण के अलग अलग रचनाये मिलती है

रामायण सबसे पहले किसने लिखी ? ये बात भारत के 99% लोग जानते है की रामायण महर्षि वाल्मीकि ने सबसे पहले लिखी. आइये जानते है की कौन है महर्षि वाल्मीकि??

महर्षि वाल्मीकि को प्राचीन वैदिक काल के महान ऋषियों कि श्रेणी में प्रमुख स्थान प्राप्त है। वह संस्कृत भाषा के आदि कवि और हिन्दुओं के आदि काव्य 'रामायण' के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध हैं। महर्षि कश्यप और अदिति के नवम पुत्र वरुण (आदित्य) से इनका जन्म हुआ। इनकी माता चर्षणी और भाई भृगु थे। वरुण का एक नाम प्रचेत भी है, इसलिए इन्हें प्राचेतस् नाम से उल्लेखि…

आप किसी भी देश के हिन्दू है तो जरूर पढ़े और बच्चों को भी बताए

क्या आप जानते है कि हिन्दू धर्म मे 33 करोड़ नहीं 33 कोटी देवी देवता हैँ; देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते हैं । एक कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता । हिंदू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उड़ाई गयी की हिन्दूओं  के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं
कोटि = प्रकार । करोड़ नहीं 
कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिंदू  धर्म में :- 12 प्रकार हैँ :-
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँशभाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...! 8 प्रकार हैं :-
वासु:, धरध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष। 11 प्रकार हैं :-
रुद्र: ,हरबहुरुप, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
                       एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार । कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी
हिन्दू सत्य सनातन धर्म की कुछ और बातें जो शायद आपको पता नहीं होगी, क्युकी सनातन धर्म इतना विशाल है की शायद किसी ने अपने सारे वेद, पुराण, और अन्य धार्मिक ग्रन्थ को सारा पढ़ा हो. जो सारा पढ़ लेगा उसे सं…

बन्दर की सीख - Hindi Story On Taking Risks

बंदरों का सरदार अपने बच्चे के साथ किसी बड़े से पेड़ की डाली पर बैठा हुआ था .
बच्चा बोला , ” मुझे भूख लगी है , क्या आप मुझे खाने के लिए कुछ पत्तियां दे सकते हैं ?”

बन्दर मुस्कुराया , ” मैं दे तो सकता हूँ , पर अच्छा होगा तुम खुद ही अपने लिए पत्तियां तोड़ लो.“
” लेकिन मुझे अच्छी पत्तियों की पहचान नहीं है .”, बच्चा उदास होते हुए बोला .
“तुम्हारे पास एक विकल्प है , ” बन्दर बोला , ” इस पेड़ को देखो , तुम चाहो तो नीचे की डालियों से पुरानी – कड़ी पत्तियां चुन सकते हो या ऊपर की पतली डालियों पर उगी ताज़ी -नरम पत्तियां तोड़ कर खा सकते हो .”
बच्चा बोला , ” ये ठीक नहीं है , भला ये अच्छी – अच्छी पत्तियां नीचे क्यों नहीं उग सकतीं , ताकि सभी लोग आसानी से उन्हें खा सकें .?”

“यही तो बात है , अगर वे सबके पहुँच में होतीं तो उनकी उपलब्धता कहाँ हो पाती … उनके बढ़ने से पहले ही उन्हें तोड़ कर खा लिया जाता !”, ” बन्दर ने समझाया .

” लेकिन इन पतली डालियों पर चढ़ना खतरनाक हो सकता है , डाल टूट सकती है , मेरा पाँव फिसल सकता है , मैं नीचे गिर कर चोटिल हो सकता हूँ …”, बच्चे ने अपनी चिंता जताई .

बन्दर बोला , “सुनो बेटा , एक बात हमेशा …

पिता की वसीहत और नसीहत

एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना । पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पिता की आखरी इक्छा बताई ।
पंडितजी ने कहा: हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है। पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो । बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ।

इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी
मेरे प्यारे बेटे
देख रहे हो..? दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता ।
एक रोज़ तुम्हें भी मृत्यु आएगी, आगाह हो जाओ, तुम्हें भी एक सफ़ेद कपडे में ही जाना पड़ेगा ।
लिहाज़ा कोशिश करना,पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना, ग़लत तरीक़े से पैसा ना कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना ।
सबको यह जानने का हक है कि शरीर छूटने के बाद सिर्फ कर्म ही साथ जाएंगे"।
लेकिन फिर भी आदमी तब तक धन के पीछे भा…

पंचतंत्र की कहानी: एक आलसी ब्राह्मण (Panchtantra Ki Kahani: The Lazy Brahmin)

बहुत समय पहले की बात है. एक गांव में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था. उसकी ज़िंदगी में बहुत ख़ुशहाल थी. उसके पास भगवान का दिया सब कुछ था. एक सुंदर-सुशील पत्नी, होशियार बच्चे, खेत-ज़मीन-पैसे थे. उसकी ज़मीन भी बहुत उपजाऊ थी, जिसमें वो जो चाहे फसल उगा सकता था. लेकिन एक समस्या थी कि वो स्वयं बहुत ही ज़्यादा आलसी था. कभी काम नहीं करता था. उसकी पत्नी उसे समझा-समझा कर थक गई थी कि अपना काम ख़ुद करो, खेत पर जाकर देखो, लेकिन वो कभी काम नहीं करता था. वो कहता, “मैं कभी काम नहीं करूंगा.” उसकी पत्नी उसके अलास्य से बहुत परेशान रहती थी, लेकिन वो चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती थी. एक दिन एक साधु ब्राह्मण के घर आया और ब्राह्मण ने उसका ख़ूब आदर-सत्कार किया. साधु ब्राह्मण की सेवा से बेहद प्रसन्न हुआ और ख़ुश होकर साधु ने कहा कि “मैं तुम्हारे सम्मान व आदर से बेहद ख़ुश हूं, तुम कोई वरदान मांगो.” ब्राह्मण को तो मुंह माँगा वरदान  मिल गया, उसने कहा, “बाबा, कोई ऐसा वरदान दो कि मुझे स्वयं कभी कोई काम न करना पड़े. आप मुझे कोई ऐसा व्यक्ति दे दो, जो मेरे सारे काम कर दिया करे.”

बाबा ने कहा, “ठीक है, ऐसा ही होगा, ले…