क्या स्थान के आधार पर नैतिक शिक्षा की परिभाषा भिन्न हो सकती है?

हम जानते है कि नैतिक शिक्षा एक प्रकार की नीतिगत शिक्षा है जिसका उद्देश्य व्यक्ति को नैतिक मूल्यों, सिद्धांतों और नियमों के बारे में जानकारी प्रदान करना और उन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू करने के लिए प्रेरित करना है। नैतिक शिक्षा का सबसे बड़ा स्रोत योग वशिष्ठ, श्रीमदभगवद गीता और अन्य शास्त्र है। 

नैतिक शिक्षा के मुख्य उद्देश्य हैं -

  1. व्यक्ति को नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों के बारे में जानकारी प्रदान करना, अर्थात ज्ञान प्राप्त करना। 
  2. व्यक्ति को नैतिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना, अर्थात ज्ञान के आधार पर सत्य को अपने विवेक  से चुनने की क्षमता विकसित करना। 
  3. व्यक्ति को समाज में एक जिम्मेदार और नैतिक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना।
  4. व्यक्ति को अपने जीवन में और समाज में नैतिक मूल्यों को लागू करने के लिए प्रेरित करना।

इसलिए नैतिक शिक्षा की परिभाषा स्थान के अनुसार भिन्न भिन्न हो सकती है, इसलिए विदेशी शक्तियां सदैव अपनी नैतिक शिक्षा अन्य देशो पर चुपके-चुपके प्रसारित करते रहते है। इसका कारण यह है कि जब उनकी नैतिक शिक्षा से प्रभावित समाज उनके द्वारा किये गए आक्रमणों का भी आवश्यकता पड़े तो अपना वास्तविक कर्तव्य भुलकर उनका समर्थन करता है, जिससे भूमि के टुकड़े अर्थात बटवारा जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। 
नैतिक शिक्षा की परिभाषा स्थान के अनुसार भिन्न भिन्न हो सकती है, इसलिए विदेशी शक्तियां सदैव अपनी नैतिक शिक्षा अन्य देशो पर चुपके-चुपके प्रसारित करते रहते है



उदाहरण के लिए -
भारत में होने वाले पाकिस्तानी आक्रमणों, चीन के द्वारा आक्रमणों का भी कुछ लोग उनका कई-कई राजनीतिक बहाने बनाकर समर्थन करते है, या उनका बचाव करते है । 
लेकिन अगर वे भारत की नैतिक शिक्षा से अवगत होते या उसका ज्ञान होता तो वे स्वयं का बलिदान देना, उनका साथ देने से अधिक उचित समझते।    

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