जातियों में बटने से टूट और एकता में शक्ति है

एक बार की बात है। कबूतरों का एक झुंड आसमान में उड़ रहा था। वे भूख से परेशान थे और दाना ढूँढ रहे थे। बहुत देर तक उड़ने के बाद एक युवा कबूतर ने नीचे देखा और बोला –

“चाचा! नीचे खेत में बहुत सारा दाना बिखरा पड़ा है। चलो सब मिलकर खा लेते हैं।”

कबूतरों का सरदार खुश होकर बोला – “ठीक है, सब नीचे उतर जाओ।”

सारे कबूतर दाना चुगने लगे। लेकिन यह दाना असल में एक बहेलिए ने फँसाने के लिए बिखेरा था। ऊपर पेड़ पर उसका जाल तना था। जैसे ही कबूतर दाना खाने लगे, जाल उन पर गिर गया और सब फँस गए।

कबूतर घबराने लगे। कोई रोने लगा, कोई डर गया। सरदार ने कहा – “डरने से कुछ नहीं होगा। जाल मजबूत है, लेकिन हमारी एकता उससे भी बड़ी है। अगर हम सब मिलकर कोशिश करें तो बच सकते हैं।”

फिर उसने आदेश दिया – “सब अपनी चोंच से जाल पकड़ो। जब मैं ‘फुर्र’ कहूँ, तो एक साथ जोर लगाकर उड़ना।”

इतने में बहेलिया डंडा लेकर दौड़ता हुआ आ गया। सरदार ने ज़ोर से कहा – “फुर्रर्रर्र!”

सारे कबूतरों ने मिलकर जोर लगाया और जाल सहित उड़ गए। बहेलिया हैरान रह गया।

कबूतरों का सरदार उन्हें पास की पहाड़ी पर ले गया। वहाँ उसका दोस्त चूहा रहता था। सरदार ने चूहे को पुकारा और सारी बात बताई।

चूहे ने तुरंत अपने दाँतों से जाल काट दिया।

कबूतर आज़ाद हो गए और खुशी से आसमान में उड़ने लगे।

इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि एकता में बहुत ताक़त होती है। अगर सब मिलकर काम करें तो बड़ी से बड़ी मुश्किल को हराया जा सकता है। इसलिए कभी भी जातियों में नहीं बटना चाहिए क्युकी जातियों में बटने से टूट और एकता में शक्ति है

जातियों में बटने से टूट और एकता में शक्ति है


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