मानव मस्तिष्क के छः दोष जो व्यक्ति को वामपंथी बना देते है।

नैतिक शिक्षा के माध्यम से हम अच्छी अच्छी बातें सीखते है। लेकिन आप अच्छी बातो का अर्थ तभी समझेंगे जब आपको ये भी पता हो की बुरी बातें क्या है। आज हम उन्ही बुरी आदतों के बारे में बात करेंगे जिनके बारे में वेद पुराण सीख देते आये है।  यहाँ हम मानव मतिष्क के 6 दोष जिनके अर्थ, लक्षण के बारे में जानेगे जो मनुष्य को वामपंथी बना देते है। 

हालाँकि ये दोष कभी भी किसी में भी लग सकते है इसलिए इनके बारे में पता होना अतयंत आवश्यक है। 


क्रोध -

अर्थ - इसकी उत्पति निराशा से होती है, 
लक्षण - जब भी कोई व्यक्ति निराश होता है सबसे पहले उसे गुस्सा या क्रोध आता है, और जैसे ही क्रोध आता है मनुष्य का विवेक गायब हो जाता है। अर्थात बुध्दि साथ छोड़ देती है जिसके कारण मनुष्य सही गलत का फैसला नहीं कर पाता है। ये बिलकुल जानवर जैसी स्थिति होती है जब सही और गलत तय न कर सके। 

काम -

अर्थ - इन्द्रियों विषयो के भोग की कामना से काम उत्पन्न होता है।
लक्षण - यहाँ इन्द्रियों विषयो के भोग को हम Sex, Love कह सकते है। जिसमे प्रेम शामिल नहीं है क्युकी प्रेम निस्वार्थ होता है। मनुष्य में जब भोग की कामना उत्त्पन्न होती है तो उतना गलत कार्य कर बैठता है जितना की एक जानवर भी नहीं कर सकता। यहाँ पर भी मनुष्य का विवेक साथ छोड़ देता है। और मनुष्य अपना धर्म और कर्तव्य दोनों भूल जाता है। अर्थात अधर्मी बन जाता है। 


ईर्ष्या -

अर्थ - दुसरो के लिए हमेशा बुरी कामना करना
लक्षण - ऐसा व्यक्ति हमेशा असंतुष्ट एवं दुखी रखता है। सुख ऐसे व्यक्तियों से कोषो दूर रहता है। ऐसे लोग आलसी होते है दुसरो की मेहनत को देखकर उनको कोसने लगते है, उनके लिए बुरी कामना करने लगते है ताकि बराबरी बनी रहे। 


लोभ -

अर्थ - लोभ का अर्थ है जरुरत से ज्यादा संग्रह करना। 
लक्षण  - मनुष्य को लगता है की वो कभी मरेगा नहीं, इसलिए सारा जीवन जरुरत से ज्यादा संग्रह करने में बिता देता है। 

मिथ्या अहंकार -

अर्थ - मिथ्या अहंकार से ग्रसित व्यक्ति अपने आपको हमेशा सही या सर्वश्रेष्ठ समझता है। 
लक्षण - मनुष्य को लगता है की वो सभी लोगो में सबसे अच्छा है। हर किसी से सीधे मुँह बात नहीं करता। 

भ्रम -

अर्थ - वास्तविकता से दूर हो जाना या आंखे होते हुए भी अँधा हो जाना। 
लक्षण - भ्रम की उत्पति अहंकार के बाद पैदा होती है। व्यक्ति अपनी अलग ही दुनियां में जीता है। ऐसे व्यक्ति वास्तविकता से बहुत दूर चले जाते है, जिनका सर्वनाश उनके शत्रुओं द्वारा निश्चित होता है। 

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